समुंदर में अब तक का सबसे बड़ा सर्च ऑपरेशन
इंडियन एयरफोर्स के लापता विमान AN-32को ढूंढने के लिए सेना युद्ध स्तर पर सर्च ऑपरेशन चला रही है। चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर के लिए रवाना हुए एयरफ़ोर्स के विमान AN32 को लापता हुए करीब 48 घंटे हो गए हैं, लेकिन अब तक विमान का कोई भी सुराग नहीं मिला है। हालांकि कोई पता नहीं लगने के कारण चिंताएं बढ़ता जा रही हैं। खोजी दलों ने बंगाल की खाड़ी में भी अपने प्रयास तेज कर दिये है। इस पूरे सर्च ऑपरेशन की रक्षामंत्री मनोहर पार्रिकर खुद मॉनिटरिंग कर रह हैं।
इतिहास में अब तक का ये सबसे बड़ा सर्च ऑपरेशन माना जा रहा है। नौसेना और कोस्टगार्ड के 18 युद्धपोत विमान को ढूंढने की कोशिश में लगे हुए हैं। इनमें एक सबमरीन भी शामिल है। इसके अलावा वायुसेना के 8 एयरक्राफ़्ट विमान को तलाशने में लगे हैं। रक्षा मंत्री मोहर पर्रिकर एक खास विमान से शनिवार सुबह तांब्रम एयरबेस पहुंचे हैं। चेन्नई से पोर्टब्लेयर के लिए रवाना हुए एयरफोर्स के एक विमान AN-32 लापता होने के बाद वह अधिकारियों के साथ जरूरी बैठक के अलावा हालात की खुद निगरानी कर रहे हैं। सर्च और रेस्क्यू के लिए नेवी के स्पेशलाइज्ड शिप आईएनएस इनवेस्टिगेटर की मदद ली जा रही है। पोर्ट ब्लेयर से रवाना शिप के जरिए हाइड्रोग्राफिक चार्ट और मैप्स के साथ ही पानी के अंदर भी खोज जारी है।
शुक्रवार को वायुसेना का विमान एएन-32 चेन्नई के तामबरम एयरबेस से 29 लोगों को लेकर अंडमान निकोबार के पोर्ट ब्लेयर जा रहा है। विमान में सवार लोगों में वायुसेना के 11, थलसेना के दो , कोस्टगार्ड के एक और नौसेना के 9 लोग थे।
विमान से शुक्रवार को सुबह 8.30 बजे उड़ान भरने के 8.46 तक विमान संचार संपर्क में था। लेकिन 9.12 मिनट के बाद विमान का रडार से संपर्क टूट गया। गौरतलब है कि जहां से विमान रडार पर से गायब हुआ, वह जगह चेन्नई से करीब 300 किलोमीटर दूरी पर है। इस जगह समंदर की गहराई करीब 3500 मीटर यानि कि करीब 10 हजार फुट है। और तभी से विमान तो खोज जारी है। विमान को 11.30 तक पोर्ट ब्लेयर पहुंचना था।
जिस समय विमान से आखिरी बार संपर्क हुआ था। उस समय विमान में सिर्फ 4 घंटे का ही फ्यूल था एसे में ये बात भी चिंता का विषय बनी हुई है कि 48 घंटे से भी ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी विमान का अब तक कोई पता नहीं चला है।
आपको बता दें कि एएन-32 विमान खराब मौसम में भी उड़ान भरने में सक्षम है और इसमें एक बार फ्यूल भरने के बाद 4 घंटे की उड़ान जारी रखने की क्षमता है। भारत के अलावा कोलंबिया, पेरू, मैक्सिको और कई अफ्रीकी देश एएन-32 विमान का इस्तेमाल करते हैं। एएन-32 विमान को भारतीय वायु सेना में 1984 में शामिल किया गया था।
एएन-32 हल्का सैन्य परिवहन एयरक्राफ्ट है जिसका 50 डिग्री सैल्सियस की भीषण गर्मी से लेकर पडाड़ियों पर 4500 मीटर की उंचाई उड़ान भरने में सक्षम है। इस प्लेन का इस्तेमाल मुख्य रूप से छोटी और मध्यम दूरी तक कारगो को लाने और ले जाने के लिए किया जाता है और आपातकाल के दौरान एयर एंम्बुलेंस के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है।

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