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Showing posts from October, 2016

यहां देवी मां को चढ़ता है हथकड़ी और बेड़ियां का चढ़ावा !

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दिवाक माता नवरात्रि का महीना चल रहा है। हर तरफ मां की गूंज ही सुनाई दे रही है। इस पावन मौके पर भक्त मां को खुश करने के लिए तरह - तरह जतन कर रहे हैं। भक्त मां को हलवा - पूरी , वस्त्र , नारियल , सिंदूर , बिंदी और मिठाई का चढ़ावा चढ़ाते हैं। हालांकि , हर मंदिर एक विशेष चढ़ावा होता है , लेकिन आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि राजस्थान में एक ऐसा मंदिर है जहां देवी मां को सिर्फ़ और सिर्फ़ हथकड़ी और बेड़ियां चढ़ाई जाती हैं। ये सुनकर आप चौंक जरूर गए होंगे ! सबकी अपनी - अपनी श्रद्धा होती है। इसलिए यहां भक्त मां को मनाने के लिए हथकड़ी और बेड़ियों के चढ़ावे का ही प्रयोग करते हैं। देवी मां का यह मंदिर राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के जोलर गांव में स्थित है , और ' दिवाक माता ' के नाम से प्रसिद्ध है। त्रिशूल में चढ़ाई जाती हैं हथकड़ियां इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि दिवाक माता के दर्शन के लिये भक्त दूर - दूर से यहां आते हैं और देवी को प्रसन्न करने के लिए मंदिर परिसर में गड़े 200 साल पुराने त्रिसूल में हथकड़ी और बेड़ियां चढ़ाते हैं। इसे भी पढ़ें-  सुबह उठकर खाएं अंकुरित काले चने...

अनोयारा खातून ! कभी मानव तस्करी का शिकार हुईं, आज किसी पहचान की मोहताज नहीं

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अनोयारा खातून ! अनोयारा खातून ! ये वो नाम है, जो कभी मानव तस्करी का शिकार हुआ था, और आज उसी के खिलाफ मजबूती से लड़ाई लड़ रहा है। कभी अनोयारा खातून पश्चिम बंगाल के परगना डिस्ट्रिक्ट के संदेशखली गांव से 18 साल की उम्र में उगवा कर ली गईं और आज उसी के खिलाफ लड़ाई लड़ कर यूनाइटेड नेशन्स तक अपना लोहा मनवा चुकी हैं। अनोयारा ख़ातून ने यूनाइटेड नेशन्स तक अपनी ऐसी पहचान बनाई है, कि संयुक्त राष्ट्र अध्यक्ष बान की मून, बिल गेट्स और मेलिंडा गेट्स जैसे दिग्गजों के समकक्ष खड़े होने का सुअवसर मिल चुका है। खातून की कामयाबी पर पूरे गांव को गर्व है। खातून कहती हैं कि, 'यूनाइटेड नेशन्स में इतने सारे लोगों के सामने अपने गांव और देश की कहानियां सुनाना मुझे मानव तस्करी के खिलाफ लड़ने की और प्रेरणा देता है।'  खातून को जब अगवा किया गया था तो, उनको एक 'SAVE THE CHILDREN' नाम के एनजीओ की मदद से छुड़ाया गया था, और अनोयारा करीब 80 वॉलिंटियर्स की टीम को संभाल रही हैं। इनकी टीम बाल विवाह, मानव तस्करी, बाल मज़दूरी जैसी सामाजिक समस्याओं से समाज को मुक्त करने के लिए काम करी रहे हैं।  अनो...

देश में अनाज की कमी नहीं, फिर भूख से मर रही जनता !

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कॉन्सेप्ट फोटो देश में अनाज की बर्बादी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक ओर जहां देश में लोग भूख से मर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हर साल 670 लाख टन खाद्य पदार्थ बर्बाद हो रहा है। अगर गौर किया जाए तो सरकार के पास अन्न के भंडारण की कोई सुविधा नहीं है। यही कारण है कि किसानों को सस्ते दामों में अनाज बेचने को मजबूर है। इस देश का सबसे अहम सवाल ये है कि यहां अनाज और अन्य खाद्य पदार्थों की कमी नहीं है, फिर भी लोग भूख से क्यों मर रहे हैं ? आज हम आपको उस हकीकत से रूबरू कराते हैं, जिसपर आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में शायद ही किसी का ध्यान जाता हो। हम बचपन से सुनते आ रहे हैं कि भारत ए क कृषि प्रधान देश है, और भारत की 70 फीसदी आबादी कृषि पर आश्रित है, हालांकि अब ये आंकड़ा 60 फीसदी के करीब पहुंच गया है । एक समय था, जब पूरा देश कृषि पर ही आश्रित हुआ करता था। यहां मुद्दा ये नहीं है कि कितनी आबादी खेती कर रही है। मुद्दा ये है कि खेती से किसान कितने ख़ुश हैं? किसानों को खेती से कितना फायदा पहुंच रहा है? किसान अनाज को सस्ते दामों में बेचने को क्यों मजबूर है ? अगर बात करें खाद्य पदार्थ...