देश में अनाज की कमी नहीं, फिर भूख से मर रही जनता !

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देश में अनाज की बर्बादी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक ओर जहां देश में लोग भूख से मर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हर साल 670 लाख टन खाद्य पदार्थ बर्बाद हो रहा है। अगर गौर किया जाए तो सरकार के पास अन्न के भंडारण की कोई सुविधा नहीं है। यही कारण है कि किसानों को सस्ते दामों में अनाज बेचने को मजबूर है। इस देश का सबसे अहम सवाल ये है कि यहां अनाज और अन्य खाद्य पदार्थों की कमी नहीं है, फिर भी लोग भूख से क्यों मर रहे हैं ?

आज हम आपको उस हकीकत से रूबरू कराते हैं, जिसपर आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में शायद ही किसी का ध्यान जाता हो। हम बचपन से सुनते आ रहे हैं कि भारत एक कृषि प्रधान देश है, और भारत की 70 फीसदी आबादी कृषि पर आश्रित है, हालांकि अब ये आंकड़ा 60 फीसदी के करीब पहुंच गया है। एक समय था, जब पूरा देश कृषि पर ही आश्रित हुआ करता था। यहां मुद्दा ये नहीं है कि कितनी आबादी खेती कर रही है। मुद्दा ये है कि खेती से किसान कितने ख़ुश हैं? किसानों को खेती से कितना फायदा पहुंच रहा है? किसान अनाज को सस्ते दामों में बेचने को क्यों मजबूर है ?

अगर बात करें खाद्य पदार्थों के बर्बादी के आंकड़ों की तो जितनी बर्बादी इस देश में हर साल हो रही है। उससे पूरे बिहार की आबादी को एक साल तक खाना खिलाया जा सकता है। हालांकि, सरकार भी ये बात बखूबी जानती है कि प्रतिवर्ष देश में लाखों टन आनाज की बर्बादी हो रही है। लेकिन सरकार इस मसले पर ठंडी बनी हुई है। 


इस बर्बादी का सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है। साथ ही ये देश की अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचा रहा है। यही कारण है कि महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। किसानों को खेती करने में लाभ तो क्या, फसल की लागत भी नहीं वसूल पा रहे हैं। साल 2013 आई में एक रिपोर्ट के मुताबिक, पूरी दुनिया में कुल खाद्य पदार्थों के उत्पादन का एक तिहाई हिस्सा बर्बाद होता है। 

देश के किसानों के अनाज के भंडारण की जानकारी पहले से ही है। पुराने समय में किसान अनाज को मिट्टी के बर्तनों में रखते थे। हालांकि, यह सिलसिला अभी तक चला आ रहा है। लेकिन सब्जियों के लिये यह तरीका उचित नहीं है। ऐसे में सरकार को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है, कि आखिर खाद्य पदार्थ क्यों बर्बाद होता है ? 

देश के कई किसान खेती में घाटे के चलते खुदकुशी कर रहे है। गुजरात, बिहार महाराष्ट्र और पंजाब जैसे राज्यों से किसानों की आत्महत्या की ख़बरें आती रहती हैं। सरकार को इस पर गौर करने की जरूरत है। 

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