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कुछ ऐसी है 20 सालों से शारीरिक शोषण का दर्द झेल रही महिला की कहानी

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टिहरी गढ़वाल की रहने वाली कुंती (काल्पनिक नाम) ने अपने देवर पर रेप का आरोप लगाया है। महिला ने आरोप लगाया है कि उसका जगवीर 20 सालों से उसका शारीरिक शोषण कर रहा था। इस मामले के सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मचा हुआ है तो वहीं पुलिस ने इस मामले में अभी तक कोर्ई कार्रवाई नहीं की है। इस घटनाक्रम से जुड़ी कई कड़ियां तब खुल गईं जब आरोपी जगवीर ने पीड़ित महिला को उसी गांव के एक मास्टर के साथ झूठे केस में फंसाने की कोशिश की। पीड़ित महिला के मुताबकि 21 फरवरी 2018 को जगवीर ने उसी मास्टर को अपने घर बुलाया। फिर उसको जमकर दारू पिलाई। जब उसने अपना होश खो दिया जब उसने उसको एक बक्से में बंद कर दिया। उस वक्त पीड़ित महिला बगल के कमरे में रात का खाना बना रही थी। जिसने पड़ोस के कमरे से आने वाली आवाजें सुनीं। जब वो कमरे मे गई तो देखा कि जगवीर एक बड़े बक्से में ताला लगा रहा था। पीड़ित महिला ने जब बक्से के बारे में जानना चाहा तो जगवीर उसके साथ जबरदस्ती करने लगा। जब उसने उसका विरोध किया तो जगवीर उसके साथ मारपीट करने लगा। मारपीट करते ही पीड़िता चिल्लाने लगी लेकिन बचाव के लिये कोई नहीं आया। पीड़ित महि...

तो क्या छात्रों की परेशानी का कारण खुद सीबीएसई बोर्ड ?

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CBSE का पेपर लीक होने के बाद स्टूडेंट परेशान हैं। एफआईआर में सामने आया है कि सीबीएसई को पेपर के एक रात पहले से ही लीक होने के बारे में जानकारी थी। ऐसे में सवाल ये खड़ा होता है कि जब बोर्ड को इसकी जानकारी थी तो परीक्षा क्यों करवाई गई ? आपको बता दें कि सीबीएसई पेपर लीक मामले में दिल्ली पुलिस 30 से ज्यादा लोगों से पूछताछ कर चुकी है। पुलिस ने जिन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की है उनमें कुछ कोचिंग सेंटर के टीचर्स हैं और कुछ स्टूडेंट हैं। हालांकि इस मामले में अभी तक पुलिस के हाथ कोई भी अहम सुराग नहीं लगा है। दिल्ली पुलिस ने कोचिंग सेंटर चलाने वाले विक्की से पूछताछ की है। उसका कहना है कि लीक पेपर उसके पास भी आया था। पेपर लीक मामले में अभी तक इसके मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी नहीं हुई है। दिल्ली पुलिस की जांच जारी है। जिसके सिलसिले में पुलिस ने बुधवार रात करीब 10 जगहों पर छापेमारी की। हालांकि , पुलिस ने छापेमारी का आधिकारिक खुलासा नहीं किया है। फिलहाल दिल्ली पुलिस पेपर लीक मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। अब सवाल ये उठता है अगर पेपर लीक होने से सीबीएसई को जानकारी थी तो सीब...

गरीब बच्चों के लिए आफत का फरमान !

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उत्तराखण्ड सरकार के एक फैसने ने गरीब बच्चों के अभिवावकों की नींद उड़ा दी है। सरकार ने नया फरमान जारी करते हुए कहा है कि सरकार अब बच्चों को किताबें न देकर उसकी रकम सीधे उनके खाते डालेगी। सरकार के इस फैसले से अभिभावकों के सामने एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है कि आखिर उनका बैंक खाता कैसे खुले? अभिभावकों के लिए सभी बच्चों का खाता खोलना जरूरी हो गया है। वहीं सरकार के इस आदेश के बाद शिक्षा विभाग ने भी अपना फरमान जारी करते हुए कहा है कि सभी अभिभावक बच्चों का खाता जल्द से जल्द खुलवा लें, जिससे उनको योजना का लाभ मिल सके। सरकार की ओर से एनसीईआरटी किताबों की छपाई के टेंडर को निरस्त करने के बाद जारी किए गए नए आदेश से भले ही अभिभावकों के लिए नई मुसीबत खड़ी हो गयी हो लेकिन अब सरकार के उन दावों का क्या होगा जिसमें सरकारी स्कूलों के गरीब बच्चों को मुफ्त किताबें देने की बात कही गयी है। अगला शिक्षण सत्र शुरू होने में कुछ ही समय बचा है और अगर ऐसे में कोई बच्चा किताबों से वंचित रह गया, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा ?

देशभर में मनाया जा रहा शहीदी दिवस

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देशभर में आज शहीदी दिवस मनाया जा रहा है। ये शहीदी दिवस उन वीर सपूतों के लिये मनाया जा रहा है। जिन्होंने भारत माता की आजादी के लिये हंसते-हंसते अपनी जान न्योछावर कर दी थी। वो दिन था 23 मार्च 1931 का। आज ही के दिन भगत सिंह , सुखदेव और राजगुरु को देश भक्ति में अपराध की संज्ञा देकर फांसी पर लटका दिया गया था। कहा जाता है कि इन क्रांति वीरों के मृत्युदंड के लिये 24 मार्च तय किया गया था लेकिन किसी बड़े जनाक्रोश की आशंका की वजह से अंग्रेजी हुकूमत ने 23 मार्च की रात को ही इनकी जीवन लीला समाप्त कर दी थी। रात में ही सतलुज के किनारे ही इनका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया था। भगत सिंह को जब फांसी की सजा सुनाई गई थी तब उनकी उम्र महज 24 साल थी। 23 मार्च 1931 की रात इन्होंने इंकलाब जिंदाबाद का नारा लगाते हुए फांसी का फंदा चूम लिया था।   क्रांति वीर भगत सिंह के लिये किसी ने लिखा है... उसे यह फ़िक्र है हरदम नया तर्ज़े-ज़फा क्या है , हमे यह शौक़ है देखें सितम की इन्तहा क्या है। दहर से क्यों खफ़ा रहें , चर्ख़ का क्यों गिला करें , सारा जहाँ अदू सही , आओ मुकाबला करें। कोई दम का...

बदायूं : कुत्ते ने दो दिन तक खाई हवालात की हवा

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आपने इंसानों के हवालात की हवा खाने के बार में कई बार सुनते हैं लेकिन क्या कभी सुना है कि कुत्ते ने हवालात की हवा खाई। चौक गये न, लेकिन बदायूं में ऐसा हुआ है। यहां एक कुत्ता दो दिनों तक हवालात की हवा खाकर बाहर आया है। दरअसल, बदायूं में एक कुत्ते पर दो लोगों ने अपनी दावेदारी ठोकी थी। विवाद बढ़ता देख पुलिस ने कुत्ते को हिरासत में ले लिया था। मामला सुलटने के दो दिन बाद कुत्ते को मालिक के हवाले कर दिया। 

मुर्दे भी जिंदा कर देती है यूपी पुलिस

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अक्सर आपने कहानियों मरे हुए व्यक्ति को जिंदा होते सुना होगा, लेकिन यूपी में ऐसा होता है। यहां मुर्दे भी जिंदा हो जाते हैं। ये घटना फतेहपुर जिले के कल्याणपुर थाना क्षेत्र की है। यहां मुर्दा जिंदा होने के बाद हड़कंप मच गया। अब तो पुलिस विभाग की ओर से मुर्दे के जिंदा होने की पुष्टि कर दी गई है। दरअसल, कल्याणपुर पुलिस ने मरे हुए व्यक्ति को फरार बताया है। दरअसल, ये घटना फतेहपुर जिले के कल्याणपुर थाना क्षेत्र के गुनीर गांव की है। यहां प्रधानी चुनाव के दौरान जिला पंचायत सदस्य व प्रधान प्रतिनिधि आशीष सिंह उर्फ पिंटू सिंह ने विरोधी प्रत्याशी विनोद विश्वकर्मा की पत्नी को चुनाव लड़ने के लिये मना किया था। जिसके बाद प्रचार के दौरान पिंटू ने अपने 14 साथियों के साथ विनोद विश्वकर्मा से साथ लूट व जानलेवा हमले की घटना को अंजाम दिया था। गुनीर गांव के 14 लोगों के खिलाफ लूट और जान से मारने की धाराओं केस दर्ज हुआ था। पुलिस ने इस मामले के मुख्य आरोपी पिंटू सिंह को जांच से बाहर कर दिया था। जिसके बाद पीड़ित विनोद विश्वकर्मा ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। हाईकोर्ट ने मामले की जांच कर रहे अधिकारी को तल...

अवैध खनन मामले में HC ने 2 IAS निलंबित करने का दिया आदेश

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवैध खनन के मामले में कड़ा रुख अख्तियार किया है। हाईकोर्ट ने रोक के बावजूद रामपुर की कोसी नदी में अवैध खनन जारी रहने के मामले में तत्कालीन 2 जिलाधिकारियों को निलंबित करने के आदेश दिये हैं, साथ ही उनके खिलाफ जांच करने के भी आदेश दिये हैं। इस मामले में कोर्ट ने मुख्य सचिव से 16 जनवरी तक कोर्ट में रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिये हैं। गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने कोसी नदी में अवैध खनन जारी रहने के मामले में तत्कालीन जिलाधिकारी राजीव रौतेला व राकेश कुमार सिंह को निलंबित करने के आदेश दिए हैं। ये फैसला चीफ जस्टिस डीबी भोसले व जस्टिस एमके गुप्ता की खंडपीठ ने मकसूद की ओर से दायर की गई पीआईएल पर सुनाया है। हाईकोर्ट ये भी कहा है कि अवैध खनन के मामले में प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो और जांच में जो भी दोषी पाया जाए उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई करें। बता दें कि वर्तमान में आईएएस राजीव रौतेला गोरखपुर और आईएएस राकेश कुमार सिंह कानपुर देहात के डीएम हैं। इसके साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी रामपुर शिव सहाय अवस्थी को भी तलब किया। हाईकोर्ट ने उनसे पूछा ह...