गरीब बच्चों के लिए आफत का फरमान !
उत्तराखण्ड सरकार
के एक फैसने ने गरीब बच्चों के अभिवावकों की नींद उड़ा दी है। सरकार ने नया फरमान
जारी करते हुए कहा है कि सरकार अब बच्चों को किताबें न देकर उसकी रकम सीधे उनके खाते डालेगी। सरकार के इस फैसले से अभिभावकों के सामने एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है कि
आखिर उनका बैंक खाता कैसे खुले? अभिभावकों के
लिए सभी बच्चों का खाता खोलना जरूरी हो गया है। वहीं सरकार के इस आदेश के बाद शिक्षा
विभाग ने भी अपना फरमान जारी करते हुए कहा है कि सभी अभिभावक बच्चों का खाता जल्द
से जल्द खुलवा लें, जिससे उनको योजना का लाभ मिल सके।
सरकार की ओर से एनसीईआरटी
किताबों की छपाई के टेंडर को निरस्त करने के बाद जारी किए गए नए आदेश से भले ही
अभिभावकों के लिए नई मुसीबत खड़ी हो गयी हो लेकिन अब सरकार के उन दावों का क्या
होगा जिसमें सरकारी स्कूलों के गरीब बच्चों को मुफ्त किताबें देने की बात कही गयी
है। अगला शिक्षण सत्र शुरू होने में कुछ ही समय बचा है और अगर ऐसे में कोई बच्चा
किताबों से वंचित रह गया, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा?

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