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Showing posts from September, 2016

देश का पहला बैंक, जहां नहीं लगाया जाता ताला

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आपने कभी ऐसे बैंक के बारे में देखा और सुना है, जहां सुरक्षा के नाम पर बैंक में ताला भी न लगाया जाता हो। लेकिन हमारे देश में एक यूको बैंक की ऐसी ब्रांच है, जिसे देश की लॉकलेस बैंक ब्रांच होने का दर्जा प्राप्त है। बता दें कि बैंक की इस ब्रांच के लिए सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक को भी अपने नियमों में बदलाव करने पर मजबूर होना पड़ा था। कोई भी बैंक हो, अपनी महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में यूको बैंक की एक ब्रांच छोटे-से कस्बे शनि शिंगणापुर में हैं। साल 2011 से पहले इस कस्बे में किसी भी बैंक ने अपनी ब्रांच नहीं खोली थी। कारण था कि यहां के लोगों ने बैंकों को बिना ताला लगाए अपनी ब्रांच खोलने के लिए कहा था, और इसके लिए बैंक, सरकार, पुलिस और आरबीआई राजी नहीं थे। आरबीआई द्वारा नियमों को बदलने के बाद यूको बैंक ने अपनी ब्रांच खोली। शुरू के महीनों में बैंक अधिकारियों को काफी डर लगा था. बैंक ने इसके लिए छुट्टी के दिन और रात में भी कर्मचारियों की तैनाती की थी, जिससे कैश की सुरक्षा हो सके। धीरे-धीरे बैंक ने इन कर्मचारियों को हटा दिया। किसी भी समय यहां ताला नहीं लगता है। चाहे बैंक में कितना भी कैश क्यों ...

यहां 118 साल से गिरफ्तार है पेड़ !

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आपने अभी तक इंसानों को गिरफ्तार होते हुए देखा और सुना होगा, लेकिन क्या कभी आपने किसी पेड़ को गिरफ्तार होने की बात सुनी है। जी हां पाकिस्तान के खैबर में एक ऐसा पेड़ है जो पिछले 118 साल से गिरफ्तार है। जानिए क्या है इस पेड़ के गिरफ्तार होने की कहानी... इस पेड़ को 1898 में गिरफ्तार किया गया था। यह पेड लांडी कोटल आर्मी में लगा है। दरअसल, इस पेड़ की गिरफ्तारी के पीछे एक दिलचस्प कहानी है। एक पाकिस्तानी अखबार के मुताबिक, ब्रिटिस शासनकाल में ब्रिटिश अफसर जेम्स स्क्वेड एक दिन टहलने निकले। जेम्स उस समय शराब के नशे में थे। जेम्स ने देखा कि एक बरगद के पेड़ उनकी ओर आ रहा है। जेम्स बरगद के विशाल पेड़ को खुद की ओर आता देख घबरा गए। फिर क्या था, उन्होनें फौरन सैनिकों को पेड़ को गिरफ्तार करने का आदेश दिया। सैनिकों ने उस पेड को जंजीरों में जकड़ दिया। तब से यह पेड जंजीरों में जकडा हुआ है। बरगद के इस पेड़ पर आज भी जंजीरें लटकी हुई हैं। साथ में आईएम अंडर अरेस्ट की तख्ती लटकी हुई है। इस पेड़ से अब तक जंजीरें इसलिए नहीं हटाई गईं जिससे अंग्रेजी शासन की क्रूरता को दर्शाया जा सके। अब यह पेड़ एक टूरिस्ट डेस्ट...

एक विदाई ऐसी भी! यहां शिक्षक की विदाई पर रोया पूरा गांव

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एक शिक्षक ही मनुष्य को जिंदगी जीने के लिए सही दिशा दिखाता है। एक शिक्षक ही मुनष्य को सही और गलत का आइना दिखाता है। इसीलिए मनुष्य के जीवन में शिक्षक का दर्जा सबसे ऊपर होता है। जब शिक्षक अच्छे हों तो उनकी विदाई पर शिष्यों का रोना लाजमी है। लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि एक शिक्षक की विदाई पर बच्चों के साथ - साथ पूरा गांव भी रोया हो ? ये न तो कहानी है और न ही कोई खबर। ये हमारे समाज के लिए वो आइना है , जो किसी शिक्षक के कर्तव्य , संघर्ष , समर्पण और ईमानदारी को दर्शाता है। इस शिक्षक ने 6 सालों में ऐसा कुछ कर दिया कि , जब उनकी विदाई हुई तो बच्चों समेत महिलाएं , किसान , अमीर - गरीब , बूढ़े सब रोए। इस कहानी से जुड़े जितने लोग भी हैं , शायद मुझसे बेहतर वो इसके बारे में आपको बता पाते। मेरे पास उस भावुक क्षण को शब्दों में पिरोने के लिए शब्द नहीं है। ये कहानी एक ऐसे शिक्षक की है , जिसके कर्मों ने पूरे गांव की आंखे नम कर दीं। साल 2009 में अवनीश यादव ने इस कहानी की इबारत लिखी। जिस गांव में कोई भी शिक्षक जाने के कतराता था , उस समय अवनीश ने इस गांव में जाकर पढ़ाने का साहस दिखाया। अवनीश प...

एक बूढ़ी औरत....

एक बूढ़ी औरत.... राजघाट पर बैठे- बैठे रो रही थी न जाने किसका पाप था जो अपने आंसुओं से धो रही थी। मैंने पूछा- माँ! तुम कौन? मेरी बात सुन कर वह बहुत देर तक रही मौन लेकिन जैसे ही उसने अपना मुह खोला लगा दिल्ली का सिंहासन डोला वह बोली- अरे! तुम जैसे नालायको के कारण शर्मिंदा हूँ, न जाने अब तक क्यो जिंदा हूँ। अपने लोगो की उपेक्षा के कारण तार- तार हूँ, चिंदी हूँ, मुझे गौर से देख... मै राष्ट्रभाषा हिन्दी हूँ। जिसे होना था महारानी आज नौकरानी है हिन्दी के आँचल में तो है सद्भाव मगर आँखों में पानी है। गोरी मेम को दिल्ली की गद्दी और मुझे बनवास ? कदम- कदम पर होता है मेरा उपहास। सारी दुनिया भारत को देख कारण चमत्कृत है एक भाषा- माँ अपने ही घर में बहिष्कृत है बेटा, मै तुम लोगों के पापो को ही बासठ वर्षो से बोझ की तरह ढो रही हूँ कुछ और नही कर सकती इसलिए रो रही हूँ। अगर तुम्हे मेरे आंसू पोंछने है तो आगे आओ सोते हुए देश को जगाओ और इस गोरी मेम को हटा कर मुझे गद्दी पर बिठाओ अरे, मै हिन्दी हूँ मुझसे मत डरो हर भाषा को लेकर चलती हूँ और सबके साथ दीपावली के दीपक- सा जलती हूँ। #साभार#तरुण कुमार भारतीय की वॉल से