यहां देवी मां को चढ़ता है हथकड़ी और बेड़ियां का चढ़ावा !
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| दिवाक माता |
नवरात्रि
का महीना चल रहा है। हर तरफ
मां की गूंज ही सुनाई दे रही
है। इस पावन मौके पर भक्त मां
को खुश करने के लिए तरह-तरह
जतन कर रहे हैं। भक्त मां को
हलवा-पूरी,
वस्त्र,
नारियल,
सिंदूर,
बिंदी
और मिठाई का चढ़ावा चढ़ाते
हैं। हालांकि,
हर
मंदिर एक विशेष चढ़ावा होता
है,
लेकिन
आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि
राजस्थान में एक ऐसा मंदिर
है जहां देवी मां को सिर्फ़
और सिर्फ़ हथकड़ी और बेड़ियां
चढ़ाई जाती हैं।
ये
सुनकर आप चौंक जरूर गए होंगे!
सबकी
अपनी-अपनी
श्रद्धा होती है। इसलिए यहां
भक्त मां को मनाने के लिए हथकड़ी
और बेड़ियों के चढ़ावे का ही
प्रयोग करते हैं। देवी मां
का यह मंदिर राजस्थान के
प्रतापगढ़ जिले के जोलर गांव
में स्थित है,
और
'दिवाक
माता' के
नाम से प्रसिद्ध है।
त्रिशूल
में चढ़ाई जाती हैं हथकड़ियां
इस
मंदिर की सबसे खास बात यह है
कि दिवाक माता के दर्शन के
लिये भक्त दूर-दूर
से यहां आते हैं और देवी को
प्रसन्न करने के लिए मंदिर
परिसर में गड़े 200
साल
पुराने त्रिसूल में हथकड़ी
और बेड़ियां चढ़ाते हैं।
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क्या
है इसके पीछे मान्यता ?
हर
किसी मंदिर की एक मान्यता होती
है। ‘दिवाक माता’ के मंदिर
में हथकड़ी और बेड़ियों के
चढ़ावे के पीछे मान्यता यह
है कि एक समय मालवा के इस जंगल
में डाकुओं का राज था। माना
जाता है कि डाकुओं ने यह प्रथा
शुरू की थी। क्योंकि डाकू
मन्नत मांगते थे कि अगर वो
डाका डालने में सफल रहे और
पुलिस के चंगुल से बच गए,
तो
वे यहां आकर हथकड़ी और बेड़ियां
चढ़ाएंगे।
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| कॉन्सेप्ट फोटो |
इस
परंपरा की दिलचस्प कहानी
इस
परंपरा के पीछे एक और दिलचस्प
कहानी है,
जिसके
मुताबिक एक पृथ्वीराणा नाम
का डाकू था। उसने जेल में दिवाक
माता से मन्नत मांगी थी कि अगर
वो जेल तोड़कर भागने में कामयाब
हो गया तो,
वह
सीधा दिवाक माता दर्शन करने
के लिए आएगा। दिवाक माता को
याद करते ही उसकी बेड़ियां
टूट गईं और वह जेल से भाग जाने
में सफल रहा।
तभी
से ये परंपरा चली आ रही है।
अपने परिवार के सदस्य या किसी
करीबी को जेल से छुड़ाने के
लिए दिवाक माता से मन्नत मागते
हैं। और अगर वो जेल से छूट जाता
है, तो
सच में यह एक चमत्कार ही है।


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